
समझें क्या है पूरा मामला
- पति के तेज खर्राटों से परेशान पत्नी ने तलाक मांगा।
- महिला ने कहा, पति अच्छे हैं पर रातभर जाग नहीं सकती।
- डॉक्टरों के अनुसार 10 साल में स्लीप एपनिया के मरीज तीन गुना बढ़े।
- मोटापा और बदलती जीवनशैली इसकी बड़ी वजह हैं।
- काउंसलिंग के बाद दंपती ने फिर साथ रहने का फैसला किया।
रिश्ते में आई खर्राटों की दीवार
दिन में इस दंपती का रिश्ता बिल्कुल सामान्य था। लेकिन रात होते ही पति के तेज खर्राटे मुसीबत बन जाते थे। पत्नी की नींद रोज टूटती थी और सुबह वह थकी हुई उठती थी। परेशान होकर उसने फैमिली काउंसलर से मदद मांगी। उसने कहा कि पति बहुत अच्छे इंसान हैं। लेकिन वह रातभर जाग नहीं सकती। यही वजह उसे तलाक तक ले गई।
डॉक्टर बोले, तेजी से बढ़ रहे मरीज
डॉक्टरों का कहना है कि खर्राटे और स्लीप एपनिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे मोटापा और बदलती जीवनशैली बड़ी वजह है। यह सिर्फ सेहत की समस्या नहीं रही। अब यह पारिवारिक रिश्तों को भी प्रभावित कर रही है। कई मामलों में यह तनाव इतना बढ़ जाता है कि रिश्ता टूटने की नौबत आ जाती है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
छाती एवं श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रखर अग्रवाल ने बताया कि पिछले 10 साल में ऐसे मरीज तेजी से बढ़े हैं। पहले हर महीने 15 से 20 मरीज आते थे। अब यह संख्या 50 से 60 तक पहुंच गई है। डॉ. अग्रवाल के अनुसार तेज खर्राटों को सामान्य नहीं समझना चाहिए। यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में सोते समय शरीर में ऑक्सीजन (Oxygen) का स्तर तेजी से गिर जाता है। सामान्य 95 प्रतिशत से यह घटकर 50 से 60 प्रतिशत तक आ सकता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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दोगुना हो सकता है हार्ट अटैक का खतरा
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि स्लीप एपनिया के मरीजों में हार्ट अटैक का खतरा सामान्य लोगों से ज्यादा होता है। तेज खर्राटे लेने वालों में यह खतरा लगभग दोगुना हो सकता है। ऑक्सीजन की कमी से खून में क्लॉट बनने का डर भी बढ़ जाता है। इससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो सकता है। असल में खर्राटे बताते हैं कि सांस की नली में कहीं रुकावट है। इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
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सिर्फ मरीज नहीं, पूरा परिवार परेशान
डॉ. अग्रवाल के अनुसार खर्राटों का असर सिर्फ मरीज तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा असर साथ सोने वाले व्यक्ति पर भी पड़ता है। तेज खर्राटों से परिवार के दूसरे लोगों की नींद भी टूटती है। वहीं मरीज की खुद की नींद भी बार-बार टूटती है। इससे दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन बना रहता है। काम में मन नहीं लगता और बैठे-बैठे नींद आने लगती है। धीरे-धीरे इसका असर पारिवारिक रिश्तों पर भी दिखने लगता है।
बप्पी लहिरी और अमाल मलिक का भी जिक्र
डॉ. अग्रवाल ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि मशहूर गायक बप्पी लहिरी ( Bappi Lahiri) की मौत की वजहों में स्लीप एपनिया भी शामिल था। उन्होंने बताया कि समय पर इलाज न होने पर रात में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि गायक अमाल मलिक भी पहले स्लीप एपनिया से पीड़ित रहे। इलाज के बाद उन्होंने खुद बताया कि उनकी सेहत और जीवनशैली में काफी सुधार आया।
काउंसलर ने बताया पांच साल पुरानी शादी का किस्सा
भोपाल की फैमिली काउंसलर रीता तुली ने बताया कि खर्राटों की वजह से दांपत्य जीवन में तनाव के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उनके पास एक महिला परामर्श के लिए आई थी। महिला ने साफ कहा कि उसे पति या परिवार से कोई शिकायत नहीं है। उसकी सिर्फ एक समस्या थी। पति रात में इतने तेज खर्राटे लेते थे कि वह सो नहीं पाती थी। सुबह शिकायत करने पर पति मानने को तैयार नहीं होते थे। धीरे धीरे यह विवाद इतना बढ़ा कि महिला ने तलाक का फैसला कर लिया। रीता तुली के अनुसार इस समस्या से महिलाएं और पुरुष दोनों समान रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
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तीन महीने अलग रहे, फिर बदला फैसला
काउंसलिंग के दौरान दोनों को समझाया गया। परिवार बचाने के लिए तीन महीने अलग रहने की सलाह दी गई। तय समय के बाद दोनों दोबारा परामर्श के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें एक दूसरे की अहमियत का एहसास हुआ। दोनों ने माना कि रिश्ते में किसी तरह की मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना नहीं थी। सिर्फ खर्राटों की वजह से तलाक लेना सही फैसला नहीं होता। आखिरकार दोनों ने साथ रहने का फैसला किया।
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