समझें क्या है पूरा मामला
Raipur। छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों के रेडीमेड गणवेश को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग का कहना है कि अब तक किसी भी जिले या स्कूल से गणवेश की खराब गुणवत्ता से जुड़ी शिकायत नहीं मिली है।
विभाग के अनुसार स्कूलों में गणवेश भेजने से पहले इसकी पूरी जांच की जाती है। यह जांच गोदाम स्तर पर तकनीकी कर्मचारियों के माध्यम से होती है। जांच के बाद ही गणवेश स्कूलों तक पहुंचाया जाता है।
स्कूलों में भेजने से पहले होती है गुणवत्ता जांच
स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि गणवेश की आपूर्ति सीधे नहीं की जाती। पहले छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के गोदामों में गणवेश की जांच होती है।
इस दौरान कपड़े की गुणवत्ता, सिलाई और तय मानकों को देखा जाता है। तकनीकी टीम की रिपोर्ट के बाद ही गणवेश को स्कूलों में भेजा जाता है। विभाग का दावा है कि संघ के गोदाम प्रभारियों और तकनीकी टीम ने गणवेश को मानक के अनुरूप पाया है।
किसी जिले से शिकायत नहीं मिलने की बात
लोक शिक्षण संचालनालय और जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर से भी इस मामले में जानकारी ली गई। विभाग के अनुसार प्रदेश के किसी भी जिले, विकासखंड, स्कूल या संकुल से गणवेश की गुणवत्ता को लेकर शिकायत नहीं आई है। विभाग ने यह भी कहा कि गणवेश को गुणवत्ता विहीन बताने वाली बातें सही तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
स्थानीय बुनकरों और महिला समूहों को काम
इस योजना के जरिए स्थानीय बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को भी रोजगार मिल रहा है। कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए रेडीमेड गणवेश स्थानीय बुनकरों से तैयार कराए जा रहे हैं। इसके बाद महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से इनकी सिलाई कराई जा रही है। इससे बच्चों को गणवेश मिल रहा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बन रहे हैं।
कई संभागों में हो चुकी है आपूर्ति
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर संभाग के सभी जिलों में प्रति छात्र दो-दो सेट गणवेश की आपूर्ति की जा चुकी है। रायपुर और दुर्ग संभाग के जिलों में भी आंशिक रूप से गणवेश भेजे जा चुके हैं। बाकी जगहों पर आपूर्ति का काम जारी है।
साइज या गुणवत्ता की दिक्कत पर बदले जाएंगे गणवेश
विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी स्कूल, संकुल या जिले से गुणवत्ता या साइज को लेकर समस्या सामने आती है, तो उसका समाधान किया जाएगा। ऐसे मामलों में गणवेश का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर गणवेश को बदला भी जाएगा।
पालकों से अपील
स्कूल शिक्षा विभाग ने पालकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे अधूरी या भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें। विभाग का कहना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और जरूरी सुविधाएं देने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। गणवेश आपूर्ति में गुणवत्ता और पारदर्शिता का ध्यान रखा जा रहा है।
Important Facts
छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों के रेडीमेड गणवेश की गुणवत्ता पर विभाग ने सफाई दी है।
विभाग का दावा है कि गणवेश की शत-प्रतिशत गुणवत्ता जांच होती है।
जांच गोदाम स्तर पर तकनीकी कर्मचारियों से कराई जाती है।
जांच के बाद ही गणवेश स्कूलों को भेजे जाते हैं।
विभाग के अनुसार किसी जिले या स्कूल से गुणवत्ता की शिकायत नहीं मिली।
कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को गणवेश दिए जा रहे हैं।
हर छात्र को दो-दो सेट गणवेश उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
स्थानीय बुनकरों से कपड़ा तैयार कराया जा रहा है।
महिला स्व-सहायता समूह गणवेश की सिलाई कर रहे हैं।
शिकायत मिलने पर गणवेश बदलने की व्यवस्था रखी गई है।
FAQ
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