समझें क्या है पूरा मामला...
- बरौंधा में नाबालिग बच्ची की गुमशुदगी दर्ज हुई।
- परिजनों ने डेढ़ महीने पहले शिकायत दर्ज कराई।
- पुलिस जांच में बाल विवाह का मामला मिला।
- बच्ची को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करेंगे।
- संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
गुमशुदगी से शुरू हुई थी बात
सतना जिले के बरौंधा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के लापता होने का मामला डेढ़ महीने पहले सामने आया था। 11 मई 2026 को परिजनों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवार ने बताया था कि 13 साल 6 महीने की उनकी बेटी घर से सामान लेने निकली थी। वह वापस नहीं लौटी। काफी तलाश के बावजूद बच्ची का पता नहीं चल पाया था। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बहला-फुसलाकर भगाने का मामला दर्ज किया। जांच शुरू कर दी गई थी।
जांच में सामने आया बाल विवाह
जांच के दौरान एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो से पता चला कि नाबालिग बच्ची का विवाह कराया गया है। यह जानकारी सामने आते ही प्रशासन हरकत में आ गया। पुलिस और बाल संरक्षण विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। यह घटना पॉक्सो एक्ट (POCSO – Protection of Children from Sexual Offences) और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के दायरे में आती है। दोनों ही कानून नाबालिग से जुड़े ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखते हैं।
बाल कल्याण समिति के सामने होगी पेशी
महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस मामले को प्राथमिकता पर लिया है। जानकारी के अनुसार बच्ची छठवीं कक्षा में पढ़ती है। उसे गुरुवार को बाल कल्याण समिति (CWC – Child Welfare Committee) के सामने पेश किया जाएगा। बच्ची के बयान और परिस्थितियों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। विभाग का कहना है कि नियमानुसार पूरी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी ने क्या कहा
महिला एवं बाल विकास अधिकारी राजीव सिंह ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला पहले उनकी जानकारी में नहीं था। थाना प्रभारी बरौंधा से इस पर चर्चा की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि बच्ची को गुरुवार को समिति के सामने पेश किया जाएगा। इसके बाद नियम अनुसार कार्रवाई होगी।
कानून क्या कहता है
प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट-2006 (Prohibition of Child Marriage Act) के तहत नाबालिग से विवाह करना गंभीर अपराध है। पॉक्सो एक्ट भी ऐसे मामलों में लागू होता है। विवाह में मदद करने वाले या आयोजन में शामिल लोगों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर दो साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही एक लाख रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कानून इस मामले को हल्के में लेने की गुंजाइश नहीं छोड़ता।
ग्रामीण इलाकों में अब भी चुनौती
यह घटना बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर फिर सवाल खड़े करती है। सख्त कानूनों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। छठवीं कक्षा की छात्रा से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जागरूकता अभियानों को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की जरूरत है। स्कूल और पंचायत स्तर पर निगरानी बढ़ाना भी जरूरी माना जा रहा है।
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