
समझें क्या है पूरा मामला
Balrampur। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से सामाजिक बहिष्कार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां हरिगवां गांव की महिला सरपंच मनबसिया बाई को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में माला पहनाए जाने के बाद समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि खैरबार समाज ने उन्हें एक साल के लिए सामाजिक रूप से अलग कर दिया है।
मामले में महिला सरपंच के परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। प्रशासन ने भी इस तरह के सामाजिक बहिष्कार को अनुचित बताया है।
कार्यक्रम में स्वागत के बाद शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार हरिगवां गांव की सरपंच मनबसिया बाई करीब दस दिन पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। कार्यक्रम में स्थानीय भाजपा नेता भी मौजूद थे। मंच पर स्वागत के दौरान भाजपा नेता ने महिला सरपंच को माला पहना दी।
इसी घटना को लेकर विवाद शुरू हुआ। समाज के कुछ लोगों ने इसे अपनी सामाजिक मर्यादा के खिलाफ माना। उनका कहना था कि किसी पुरुष को महिला सरपंच को सार्वजनिक रूप से माला नहीं पहनानी चाहिए थी। समाज के लोगों के अनुसार नेता को माला हाथ में देकर सम्मान करना चाहिए था।
एक साल के बहिष्कार का फरमान
परिवार का आरोप है कि इस घटना के बाद खैरबार समाज ने महिला सरपंच और उनके परिवार को एक साल के लिए समाज से बहिष्कृत कर दिया। परिवार का कहना है कि अब उन्हें सामाजिक कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जा रहा है। रिश्तेदारों और समाज के लोगों से दूरी बनाई जा रही है।
इस बहिष्कार के कारण परिवार मानसिक दबाव में है। महिला सरपंच के पति देवेंद्र खैरबार ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि समाज में इस तरह का फैसला परिवार को परेशान करने वाला है।
वापसी के लिए बकरा-भात की शर्त
मामले में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। परिवार के अनुसार समाज में वापस शामिल करने के लिए बकरा-भात खिलाने की शर्त रखी गई है। इसे सामाजिक दंड बताया गया है।
परिवार का आरोप है कि जब तक यह शर्त पूरी नहीं होगी, तब तक समाज में उनकी वापसी नहीं होगी। इसी कारण पीड़ित परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
पति ने भी जताई आपत्ति
महिला सरपंच के पति देवेंद्र खैरबार ने कहा कि उनके समाज में किसी महिला को माला पहनाने को लेकर कुछ पारंपरिक मान्यताएं हैं। उन्होंने कहा कि पति के अलावा किसी अन्य पुरुष द्वारा माला पहनाना सामाजिक रूप से गलत माना जाता है।
हालांकि उन्होंने समाज के बहिष्कार के फैसले को लेकर नाराजगी भी जताई है। उनका कहना है कि ऐसी घटना पर बातचीत से समाधान निकल सकता था। पूरे परिवार को समाज से अलग करना उचित नहीं है।
प्रशासन ने बहिष्कार को बताया गलत
वाड्रफनगर के एसडीएम नीर निधि नन्देहा ने मामले की जानकारी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शिकायत दर्ज कराई गई है। समाज के लोगों को समझाइश दी जाएगी।
एसडीएम ने कहा कि माला पहनाने जैसी घटना के आधार पर सामाजिक बहिष्कार करना उचित नहीं है। प्रशासन इस मामले में आवश्यक कदम उठाएगा।
सामाजिक कुप्रथा पर फिर उठा सवाल
यह मामला सिर्फ एक महिला सरपंच से जुड़ा विवाद नहीं है। यह ग्रामीण समाज में चली आ रही सामाजिक बंदिशों और बहिष्कार जैसी प्रथाओं पर भी सवाल उठाता है। सार्वजनिक जीवन में चुनी हुई महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उनके सम्मान और स्वतंत्रता को लेकर संवेदनशीलता जरूरी है।
महिला सरपंच जनता की चुनी हुई प्रतिनिधि हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनका स्वागत सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे मामलों में सामाजिक दबाव और बहिष्कार जैसे फैसले महिलाओं की सार्वजनिक भूमिका को कमजोर कर सकते हैं।
फिलहाल जांच और समझाइश की तैयारी
शिकायत के बाद अब प्रशासन समाज के लोगों से बातचीत करेगा। पुलिस और स्थानीय प्रशासन मामले की स्थिति देख रहे हैं। पीड़ित परिवार चाहता है कि उन्हें सामाजिक दबाव से राहत मिले और बहिष्कार खत्म कराया जाए।
इस मामले ने बलरामपुर जिले में सामाजिक परंपराओं और कानूनी अधिकारों के बीच टकराव को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन समझाइश से मामला सुलझाता है या आगे कोई कानूनी कार्रवाई होती है।
IMP FACTS
मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले का है।
हरिगवां गांव की सरपंच मनबसिया बाई का बहिष्कार हुआ।
एक कार्यक्रम में भाजपा नेता ने उन्हें माला पहनाई थी।
खैरबार समाज ने इसे सामाजिक मर्यादा के खिलाफ माना।
समाज ने सरपंच परिवार को 1 साल के लिए बहिष्कृत किया।
समाज में वापसी के लिए बकरा-भात खिलाने की शर्त रखी गई।
परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
प्रशासन ने सामाजिक बहिष्कार को अनुचित बताया है।
FAQ
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