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बदलेगा सरिस्का टाइगर रिजर्व का नक्शा, बनेगा बाघों का नया कॉरिडोर

By Jageshwar prasad | Jul 02, 2026
समझें क्या है पूरा मामला राजस्थान में जंगलों का नक्शा बदलने की तैयारी। अधिक असर…

समझें क्या है पूरा मामला

राजस्थान में जंगलों का नक्शा बदलने की तैयारी है। जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी हो सकती है।

सबसे बड़ा बदलाव जयपुर-सरिस्का के पूरे वन्यजीव क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही पूरे राज्य के नए गठित जिलों में एक दर्जन से अधिक नई वन रेंज बनाई जाएंगी।

​अधिकारियों के अनुसार नए प्रस्ताव को राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा की मंजूरी मिल चुकी है। औपचारिक अधिसूचना जारी होते ही इसे चरणबद्ध तरीके से लागू कर दिया जाएगा।

​सरिस्का का बनेगा नया डिवीजन

​इस पूरे प्रोजेक्ट का सरिस्का टाइगर रिजर्व पर बड़ा असर दिखने वाला है। सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़ने के बाद इसका दायरा बढ़ाने की तैयारी है।

प्रस्ताव के अनुसार सरिस्का टाइगर रिजर्व-2 (STR-2) के नाम से नया डिवीजन बनाया जाना है। इसके तहत बीलवाड़ी, विराटनगर, थानागाज़ी और अजबगढ़ के कुछ हिस्सों को एक साथ लाया जा रहा है।

​क्यों है यह इलाका खास?

हाल के वर्षों में यह क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद अहम हो गया है। सरिस्का टाइगर रिजर्व (STR) से निकलने वाले बाघ अक्सर प्रस्तावित इलाके को अपने आने-जाने के कॉरिडोर (रास्ते) के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। 

हाल ही में सरिस्का के एक नर बाघ ने इसी कॉरिडोर का इस्तेमाल कर जयपुर की सीमाओं तक का सफर तय किया था। अधिकारियों के अनुसार इससे इन जंगलों की अहमियत और बढ़ जाती है।

​जयपुर को मिलेगा वाइल्डलाइफ डिवीजन

​जयपुर में वन्यजीवों के संरक्षण को देखते हुए वन विभाग ने जयपुर वन्यजीव डिवीजन को अलग करने का प्रस्ताव रखा है।

दौसा, बांदीकुई रेंज के हिस्से, जमवारामगढ़ और रायसर के तहत आने वाले वन क्षेत्रों को पुनर्गठित कर इसे तैयार किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि इससे मौजूदा डिवीजन पर प्रशासनिक बोझ कम होगा। मैदानी स्टाफ का पूरा ध्यान अब संवेदनशील और कमजोर वन क्षेत्रों की निगरानी, उनके आवास के संरक्षण और वन्यजीव कानूनों को कड़ाई से लागू करने पर होगा।

इसके तहत एक स्वतंत्र वाइल्डलाइफ डिवीजन काम करेगा। इसमें ​नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, 
​हाथी गांव, ​झालाना लेपर्ड रिजर्व और ​नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य शामिल होंगे।

आईएफएस अधिकारी संभालेंगे कमान

इस नए डिवीजन के मुखिया भारतीय वन सेवा (IFS) के एक अधिकारी होंगे। वे वन्यजीव संरक्षण, रेस्क्यू ऑपरेशन्स, पर्यटन प्रबंधन और चिड़ियाघर (Zoo) व संरक्षित क्षेत्रों के प्रशासन की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे।

​अधिकारियों का कहना है कि अब तक जयपुर के चिड़ियाघर का प्रशासन जयपुर डीएफओ के तहत एक अतिरिक्त प्रभार के रूप में चल रहा था। इस वजह से शहर की बढ़ती वन्यजीव संपदा को वह फोकस और ध्यान नहीं मिल पा रहा था, जिसकी जरूरत थी। नया डिवीजन बनने से यह कमी दूर होगी।

​अवैध खनन पर लगेगी लगाम

अधिकारियों का दावा है कि ​नई वन रेंजों के बनने से जमीनी स्तर पर वनकर्मियों की मौजूदगी मजबूत होगी। गश्त बेहतर होगी। वन्यजीवों के रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। 

साथ ही, वन्यजीवों से जुड़ी किसी भी घटना पर तुरंत रिस्पांस दिया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार जयपुर के बाहरी इलाकों में होने वाले अवैध खनन पर अब वन विभाग पैनी नजर रख सकेगा।

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