NextGen GoCMS

राइजिंग राजस्थान सिर्फ एमओयू तक, अब तक 83 प्रतिशत प्रोजेक्ट अधर में

By Jageshwar prasad | Jul 02, 2026
समझें क्या है पूरा मामला राइजिंग राजस्थान के तहत इन्वेस्टमेंट समिट-2024 का आयोजन हुआ।…

समझें क्या है पूरा मामला

Jaipur: राजस्थान में औद्योगिक विकास की रफ्तार दावों और जमीनी हकीकत के बीच झूल रही है।
राइजिंग राजस्थान का नारा सिर्फ निवेश समझौते (MoU) तक सिमटकर रह गया। 

राजस्थान सरकार ने लंबे-चौड़े दावों के साथ राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 का आयोजन किया था। इसमें 45 लाख करोड़ रुपए के 22299 एमओयू किए गए। 

हैरत की बात यह है कि अब तक 3,895 परियोजनाओं पर ही काम शुरू हो पाया। लगभग 83 प्रतिशत परियोजनाएं आज भी धरातल पर उतरने का इंतजार कर रही हैं।

जो धरातल पर आ पाए एमओयू

​सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बड़ी संख्या में निवेश प्रस्ताव अब भी केवल कागजों और शुरुआती प्रशासनिक फाइलों में ही दबे हुए हैं। 

​विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बताया गया कि कुल प्रस्तावित 3,895 एमओयू ही वास्तविक क्रियान्वयन के चरण तक पहुंच पाए हैं। 

इन परियोजनाओं में कुल 8.01 लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इससे राज्य में लगभग 2.88 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है।

उद्योग विभाग में सबसे अधिक एमओयू

अगर सेक्टर-वार बात की जाए तो सबसे अधिक उद्योग विभाग के तहत 13,341 एमओयू के जरिए 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।

ऊर्जा क्षेत्र में अकेले 1,390 एमओयू किए गए हैं। इनमें कुल 35.26 लाख करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव है।

वहीं,  कृषि, पशुपालन, और उच्च व तकनीकी शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी निवेश के समझौते किए गए हैं, लेकिन इनकी जमीनी रफ्तार काफी धीमी है।

​निवेशकों के पीछे हटने की वजह?

एक अधिकारी ने बताया कि कई बड़ी कंपनियों और निवेशकों ने अपने एमओयू रद्द करने या वापस लेने का अनुरोध किया है। 

उद्योग मंत्री ने खुद सदन में स्वीकार किया कि कई निवेशक अब बदलती परिस्थितियों में अपने कदम पीछे खींच रहे हैं। 

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार अपने वादे के अनुरूप नियमों को इंडस्ट्री फ्रेंडली नही बना पाई।
निवेश में सबसे बड़ी बाधा भूमि रूपांतरण की जटिल प्रक्रिया है।

पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी मिलने में देरी और बुनियादी ढांचे (बिजली, पानी, सड़क) की कमी को भी निवेश की राह में बड़ा रोड़ा माना जा रहा है। 

मुख्यमंत्री स्तर पर कड़ी निगरानी 

उद्योग विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ​निवेश प्रस्तावों को ठंडे बस्ते में जाने से बचाने के लिए सीएम स्तर पर विशेष निगरानी प्रणाली बनाई गई है।

बताया जाता है कि 1,000 करोड़ रुपए से अधिक के सभी बड़े एमओयू की समीक्षा खुद मुख्यमंत्री स्तर पर की जा रही है।

​वहीं, 100 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपए तक के निवेश प्रस्तावों की समीक्षा मुख्य सचिव और जिला स्तर पर 100 करोड़ से कम के प्रस्तावों की मॉनिटरिंग जिला कलेक्टरों को सौंपी गई है। 

हकीकत होने का इंतजार

राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और अनुसंधान निगम के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि सिंगल विंडो सिस्टम अधिक मजबूत किया जाए, जिससे निवेशकों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। 

​विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार बड़े पैमाने पर वैश्विक निवेश आकर्षित कर प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलना चाहती है, लेकिन प्रशासनिक अड़चनें इन सपनों के आड़े आ रही हैं। 

एक विशेषज्ञ की राय में मुख्यमंत्री का नया निगरानी सिस्टम 83 प्रतिशत लंबित पड़े निवेशों को कितनी जल्दी हकीकत में बदल पाता है।

FAQ

राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट-2024 की वास्तविक स्थिति क्या है?
इस समिट में 45 लाख करोड़ रुपए के निवेश के लिए 22,299 एमओयू (MoU) किए गए थे। अभी लगभग 83% प्रोजेक्ट्स अधर में हैं। अब तक केवल 3,895 परियोजनाओं पर ही काम शुरू हो पाया है, जो कि कुल निवेश प्रस्तावों का एक बहुत छोटा हिस्सा है।
राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट-2024 में निवेशकों के पीछे हटने के मुख्य कारण क्या हैं?
​निवेश की राह में कई प्रशासनिक और बुनियादी अड़चनें सामने आ रही हैं। भूमि रूपांतरण, सरकारी नीतियां, ​NOC में देरी और ​बुनियादी ढांचे की कमी बड़ी बाधा है।
लंबित पड़े निवेश प्रस्तावों को रफ्तार देने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
निवेश प्रस्तावों को ठंडे बस्ते में जाने से बचाने के लिए सीएम स्तर पर त्रि-स्तरीय निगरानी प्रणाली बनाई गई है। ​1,000 करोड़ रुपए से अधिक के सभी बड़े एमओयू की समीक्षा खुद मुख्यमंत्री कर रहे हैं। ​100 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपए तक के प्रस्तावों की समीक्षा की जिम्मेदारी मुख्य सचिव को सौंपी गई है। इससे कम के प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग जिला कलेक्टर कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें:-

चौंप स्टेडियम की IIT मुंबई करेगी स्ट्रक्चरल जांच, फिर शुरू होगा निर्माण

HPCL प्रदेश में 300 से ज्यादा पेट्रोल पंप खोलेगा, 400 करोड़ का होगा निवेश

ग्राहकों को चूना लगाना पड़ेगा महंगा, गड़बड़ी पर कड़े जुर्माने का मसौदा जारी

बूढ़े बिजलीघरों को मिलेगा जीवन, नए अवतार में लाने की तैयारी

 

 

Stay Updated! Join Our Channels

WhatsApp Join Telegram Join