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राम मंदिर के बाद अब केदारनाथ में दान चोरी का आरोप, कांग्रेस ने उठाए सवाल

By Sanjay Dhiman | Jul 04, 2026
राम मंदिर में दान को लेकर विवाद पहले से चल रहा था। अब केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में भी…

राम मंदिर में दान को लेकर विवाद पहले से चल रहा था। अब केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में भी दान की गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे लेकर भाजपा पर हमला बोला है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी बीकेटीसी ने जांच समिति बना दी है। समिति जल्द अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी।

देश के दो सबसे बड़े हिमालयी तीर्थस्थलों से जुड़ा यह विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। सोशल मीडिया पर दान राशि में हेराफेरी की चर्चाओं ने इस मुद्दे को हवा दी। इसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार और मंदिर प्रबंधन को घेरना शुरू कर दिया।

जयराम रमेश का तीखा हमला

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि राम मंदिर के नाम पर वोट मांगे गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब वही आस्था विवादों में घिर रही है। रमेश का कहना था कि केदारनाथ और बद्रीनाथ में भी दान से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे मामले सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में ही क्यों दिख रहे हैं। उनका आरोप है कि मंदिर ट्रस्टों में भाजपा और आरएसएस (RSS – Rashtriya Swayamsevak Sangh) से जुड़े लोगों की मौजूदगी है। रमेश ने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इसकी जानकारी पहले से नहीं थी।

बीकेटीसी की सफाई और कार्रवाई

आरोपों के बाद श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी बीकेटीसी (BKTC – Badrinath Kedarnath Temple Committee) हरकत में आई। समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर उठे आरोपों को गंभीरता से लिया गया है।

द्विवेदी के अनुसार दान गिनती से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजे जा चुके हैं। साथ ही एक जांच समिति तुरंत गठित कर दी गई है। यह समिति जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और रिपोर्ट सार्वजनिक भी होगी।

दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। द्विवेदी ने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए समिति पूरी सतर्कता बरत रही है।

पहले ही जारी हो चुके थे सख्त निर्देश

यह विवाद बढ़ने से पहले ही 2 जुलाई 2026 को बीकेटीसी के सीईओ (CEO – Chief Executive Officer) सोहन सिंह रंगर ने दान और चढ़ावे को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। इनमें दान गिनती केंद्र, लेखा शाखा, कोषागार और पूजा काउंटरों पर तैनात कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया था। मकसद था कि दान संग्रह और लेखा-जोखा में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

सियासी विवाद क्यों गहराया

राम मंदिर विवाद पहले से चर्चा में था। अब केदारनाथ-बद्रीनाथ का मामला जुड़ने से यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। विपक्ष इसे धार्मिक आस्था और राजनीति को जोड़कर देख रहा है। वहीं सत्तापक्ष और मंदिर प्रबंधन इसे प्रशासनिक मामला बता रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर रहेगी।

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