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मंत्रियों की क्लास से धड़कनें बढ़ी, रिफाइनरी का शुभ दिन आया, जगन का अंत

मंत्रियों की क्लास से धड़कनें बढ़ी, रिफाइनरी का शुभ दिन आया, जगन का अंत

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Jinesh Jain

Published Jul 04, 2026 at 18:57

राजस्थान के लिए यह हफ्ता विकास की नई चमक और सियासत की तपिश लेकर आया। एक तरफ पचपदरा…

राजस्थान के लिए यह हफ्ता विकास की नई चमक और सियासत की तपिश लेकर आया। एक तरफ पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण से औद्योगिक विकास को नए पंख लगे, वहीं दिल्ली में अमित शाह से मंत्रियों की मुलाकात ने मंत्रिमंडल फेरबदल के संकेत दे दिए हैं। 

खेल के मैदान में हाई कोर्ट ने आरसीए पर कड़ा चाबुक चलाकर नेताओं के बेटों का राज खत्म किया। इसके दूसरी तरफ अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर का अंत हो गया। इसी बीच, कृषि विभाग में घूसखोरी के नए खुलासे ने यह साफ कर दिया कि व्यवस्था में भ्रष्टाचार की दीमक अभी भी सक्रिय है।

मरूधरा का नया पावर हाउस

​शनिवार का दिन राजस्थान के लिए अच्छा रहा। पीएम नरेंद्र मोदी ने पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण कर दिया। इसका मोदी के हाथों 21 अप्रैल को उद्घाटन होना था। तब एक दिन पहले रिफाइनरी में आग लग गई।

इसके बाद पीएम का कार्यक्रम स्थगित हो गया। आग के जख्मों को फटाफट दुरुस्त कर इसे देश को सौंप दिया गया है। मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन और जयपुर मेट्रो फेज 2 का शिलान्यास भी किया।

इस रिफाइनरी पर करीब 79,450 करोड़ रुपए की लागत आई है। इसमें एचपीसीएल (74%) और राजस्थान सरकार (26%) साझीदार हैं। यह रिफाइनरी हर साल 90 लाख टन कच्चा तेल साफ करेगी। रोजाना 1.8 लाख बैरल कच्चे तेल का शोधन होगा। यह कई छोटे देशों की कुल क्षमता के बराबर है।

यह रिफाइनरी राजस्थान के लिए सिर्फ एक कारखाना नहीं, बल्कि गेम चेंजर है। अब तक राजस्थान में निकलने वाला क्रूड ऑयल शोधन के लिए गुजरात भेजा जाता था। इसमें राज्य को पूरा आर्थिक फायदा नहीं मिलता था। अब यहां पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनने से पश्चिमी राजस्थान में छोटे उद्योगों का जाल बिछेगा।

पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण

दिल्ली में क्लास और जयपुर में हलचल

​भजनलाल सरकार के ढाई साल पूरे होते ही यहां की राजनीति का पारा अचानक चढ़ गया है। पीएम मोदी के दौरे से ठीक पहले तीन कद्दावर मंत्री अचानक दिल्ली पहुंचे। उन्होंने वहां अलग अलग समय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। 

इन मंत्रियों में गजेंद्र सिंह खींवसर, मदन दिलावर और किरोड़ीलाल मीणा हैं। सूत्रों की मानें तो शाह ने तीनों विवादित मंत्रियों की परफॉर्मेंस का हिसाब लिया। साथ ही उन्हें कम बोलना और ज्यादा काम करने की सख्त हिदायत दी।

​बताया जाता है कि कई मंत्रियों के खराब फीडबैक से सरकार की छवि बिगड़ रही थी। कयास हैं कि पीएम के दौरे के बाद राजस्थान मंत्रिमंडल में बहुत बड़ा ऑपरेशन (बदलाव) होने वाला है।
इस मुलाकात का समय और मंत्रियों का चयन बहुत कुछ बयां करता है।

ये तीनों वही मंत्री हैं जो अपने बयानों या कार्यशैली के कारण लगातार सुर्खियों और विवादों में रहे हैं। सरकार के ढाई साल पूरे होने पर आलाकमान यह संदेश देना चाहता है कि अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। पीएम के दौरे के तुरंत बाद फेरबदल की सुगबुगाहट है। सूत्रों के अनुसार भाजपा आगामी चुनावों से पहले एंटी-इंकंबेंसी को खत्म करना चाहती है।

गजेंद्र सिंह खींवसर और अमित शाह

​खेल राजनीति का विकेट गिरा

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में बरसों से चल रही नेताओं के बेटों की पारी पर हाई कोर्ट ने नो-बॉल फेंक दी है। कोर्ट ने मंत्री विधायकों के बेटों से सजी एडहॉक कमेटी को तुरंत सस्पेंड कर दिया। अब सीनियर आईएएस अफसर भास्कर ए. सावंत आरसीए की कमान संभालेंगे। उन्हें 3 महीने में निष्पक्ष चुनाव कराने का अल्टीमेटम मिला है।

सहकारिता रजिस्ट्रार ने लगातार 10वीं बार एडहॉक कमेटी का कार्यकाल बढ़ाया था। इसमें विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित कन्वीनर और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सहित कई रसूखदार कैप्टन बने बैठे थे। अब 29 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।

राजस्थान में सत्ता चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की, आरसीए हमेशा नेताओं के परिवारों के लिए सुरक्षित ठिकाना रही है। पहले अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत अध्यक्ष थे। सरकार बदलते ही भाजपा नेताओं के बेटों ने कब्जा कर लिया। कोर्ट का यह सख्त रुख खेल संघों के लोकतांत्रीकरण के लिए जरूरी था। 

अजमेर जेल में मर्डर: डकैत जगन गुर्जर का अंत

सुरक्षा के लिहाज से अजमेर की जेल राजस्थान की सबसे अभेद्य मानी जाती है। इस हफ्ते चंबल के पूर्व खूंखार डकैत जगन गुर्जर की जेल में बेरहमी से हत्या कर दी गई।

भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु जाट ने बैरक के भीतर मामूली तौलिए से जगन का गला घोंट दिया। तीन राज्यों (राज, एमपी, यूपी) में आतंक का पर्याय रहे जगन पर 128 मामले दर्ज थे। उसके खौफ का आलम यह था कि कई गांवों में शादियां तक बंद हो गई थीं। तीन बार सरेंडर और कसम खाने के बाद भी वह अपराध की दुनिया से बाहर नहीं आ सका।

यह घटना जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है। जिसे हाई सिक्योरिटी जेल कहा जाता है, वहां एक कैदी दूसरे का मर्डर कर देता है। यह कानून-व्यवस्था के इकबाल पर चोट है। जगन का अंत यह भी सिखाता है कि जुर्म का रास्ता चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका अंत हमेशा दर्दनाक ही होता है।

jagan gurjar

​कृषि विभाग में भ्रष्टाचार का वायरस

​अभी जून महीने में बीज निगम में 2.44 करोड़ की घूसखोरी का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कृषि विभाग में एक और बड़ा धमाका कर दिया।

भिवाड़ी और कोटपूतली में खाद-कीटनाशक फैक्ट्रियों का मुआयना कर लौट रही कृषि विभाग की टीम को दबोच लिया। एसीबी ने उनकी टाटा सफारी की तलाशी ली। इसमें कृषि अधिकारी महेश कुमार मीणा के बैग से 1.48 लाख और चन्दा राम गुर्जर के बैग से 1.15 लाख रुपए कैश मिले। अधिकारियों की गाड़ी से कुल 2,63,500 रुपए की अवैध वसूली जब्त की गई है।

लगातार दूसरे महीने कृषि विभाग में घूसखोरी का पकड़ा जाना यह दिखाता है कि यह सिस्टमेटिक करप्शन है। अधिकारी डर दिखाकर फैक्ट्रियों से महीना या सुविधा शुल्क वसूलते हैं। एसीबी की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सवाल भी उठाती है कि बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे यह खेल कैसे चल रहा था।

अगले सप्ताह फिर मिलेंगे एक नई चिट्ठी के साथ!

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