समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में MBBS और BDS की काउंसलिंग जल्द शुरू होगी। सीट देने से पहले दस्तावेजों की जांच नहीं होगी। एडमिशन के ठीक पहले स्क्रूटिनी की जाएगी। पिछले 5 साल से आवंटन सूची पर आपत्ति नहीं की जा सकती। गलत दस्तावेज वालों की सीट बाद में रद्द हो सकती है। रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में इस बार भी मेडिकल एडमिशन का पुराना तरीका ही अपनाया जाएगा। नीट यूजी 2026 का रिजल्ट आने के बाद ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू होगी। इसमें छात्रों को कॉलेज और सीट का चुनाव करना होगा।
पहले सीट, फिर जांच
काउंसलिंग की प्रक्रिया में सीट अलॉटमेंट पहले होता है। इसके बाद ही दस्तावेजों की जांच की जाती है। यह नियम पहले भी विवादों में रहा है। फिर भी चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसे नहीं बदला।विभाग की जिम्मेदारी पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया कराने की है। पिछले पांच सालों से आवंटन सूची पर कोई दावा-आपत्ति नहीं ली जा रही। पहले यह प्रक्रिया अलग थी। अनंतिम सूची जारी होने के बाद आपत्तियां मंगाई जाती थीं। आपत्तियों की जांच के बाद अंतिम सूची बनती थी। अब सीधे अनंतिम सूची को अंतिम सूची में बदल दिया जाएगा। इसका मतलब है कि छात्रों को पहले ही सीट मिल जाएगी। लेकिन बाद में दस्तावेज गलत निकलने पर सीट छिन सकती है। इससे कुछ छात्रों को नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।
क्यों अटका है नया सेशन
इस साल नीट यूजी परीक्षा में देरी हुई है। परीक्षा 21 जून को दोबारा करानी पड़ी। नतीजा इसी महीने के अंत तक आने की उम्मीद है। इसके बाद अगस्त के आखिरी हफ्ते या सितंबर में काउंसलिंग शुरू हो सकती है। नीट में देरी की वजह से नया शैक्षणिक सत्र भी लेट होना तय माना जा रहा है। छात्रों को इंतजार लंबा करना पड़ रहा है। कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया भी इसी वजह से पिछड़ेगी। साल 2027 में होने वाली नीट यूजी परीक्षा कंप्यूटर आधारित यानी ऑनलाइन होने वाली थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया। ऑनलाइन परीक्षा में नकल की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है। इसी वजह से कई एक्सपर्ट इसे बेहतर विकल्प मानते हैं।
एक्सपर्ट्स की राय
मेडिकल क्षेत्र के जानकार लंबे समय से इस मुद्दे पर बोलते रहे हैं। रिटायर्ड डीएमई (DME - Director of Medical Education) डॉ. विष्णु दत्त का मानना है कि परीक्षा कंप्यूटर मोड में होनी चाहिए थी। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है। हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल भी इस राय से सहमत नजर आते हैं। उनका कहना है कि नीट पीजी लंबे समय से इसी तरीके से हो रही है। पेन और पेपर मोड में परीक्षा हो तो सख्ती बढ़ानी जरूरी हो जाती है। इससे दोबारा परीक्षा कराने की नौबत नहीं आएगी।
छत्तीसगढ़ में सीटों की स्थिति
राज्य में फिलहाल 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेज हैं। इनमें एमबीबीएस की कुल 2330 सीटें उपलब्ध हैं। इस बार प्रदेश के 45 हजार से ज्यादा छात्रों ने दोबारा परीक्षा दी। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का इंतजार अब रिजल्ट पर टिका है। काउंसलिंग शुरू होते ही छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स चुनने का मौका मिलेगा। लेकिन दस्तावेजों को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी होगा। क्योंकि जांच में गड़बड़ी मिलने पर सीट वापस भी ली जा सकती है।
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