समझें क्या है पूरा मामला
Raipur। रायपुर के चर्चित नव्या मलिक ड्रग्स केस में अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की एंट्री हो गई है। रायपुर की गंज पुलिस ने इस मामले से जुड़े दस्तावेज ED को सौंप दिए हैं। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने इसकी पुष्टि की है।
अब जांच सिर्फ ड्रग्स सप्लाई तक सीमित नहीं रहेगी। ED इस पूरे नेटवर्क में पैसों के लेनदेन की जांच करेगी। इसमें बैंक खाते, संपत्ति, संदिग्ध निवेश और मनी ट्रेल शामिल हैं।
ED क्यों कर रही है जांच
इस केस में पुलिस ने पहले ड्रग्स सप्लाई और नेटवर्क की जांच की थी। अब ED यह देखेगी कि इस कारोबार से कमाया गया पैसा कहां गया। क्या इस पैसे को किसी संपत्ति या बिजनेस में लगाया गया। क्या अवैध कमाई को वैध दिखाने की कोशिश हुई।
अगर जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिलते हैं, तो ED अलग केस दर्ज कर सकती है। इसके बाद आरोपियों से पूछताछ और संपत्तियों की जांच भी तेज हो सकती है।
होटल और पार्टियों से जुड़ा नेटवर्क
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, नव्या मलिक पर इवेंट और टेक्नो पार्टियों की आड़ में ड्रग्स सप्लाई कराने का आरोप है। ये पार्टियां फाइव स्टार होटल, रिजॉर्ट, पब, क्लब और बड़े कैफे में होती थीं।
इन पार्टियों में अमीर परिवारों से जुड़े युवक शामिल होते थे। आरोप है कि ऐसे युवाओं को पहले नेटवर्क में जोड़ा जाता था। इसके बाद उन्हें ड्रग्स का ग्राहक बनाया जाता था।
850 से ज्यादा लोगों के संपर्क का दावा
पुलिस पूछताछ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, नव्या मलिक के संपर्क में करीब 850 लोग थे। इनमें कई अमीर परिवारों से जुड़े युवक बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनमें से कौन केवल ग्राहक था और कौन इस नेटवर्क को आगे बढ़ाने में शामिल था।
पुलिस को शक है कि इस रैकेट में होटल, पब और क्लब से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी हो सकती है। कुछ मैनेजरों और संचालकों पर भी जांच की नजर है।
पहले दोस्ती फिर नशे का जाल
जांच में यह बात सामने आई है कि क्लब और पार्टियों में आने वाले युवाओं से पहले दोस्ती की जाती थी। इसके लिए युवतियों का इस्तेमाल किया जाता था। आरोप है कि बाद में इन्हीं युवाओं को ड्रग्स लेने के लिए उकसाया जाता था।
धीरे-धीरे उन्हें नियमित ग्राहक बनाया जाता था। इसी तरीके से नेटवर्क बढ़ाया गया। नव्या मलिक और विधि अग्रवाल पर भी इसी मॉडल से ड्रग्स कारोबार फैलाने का आरोप है।
कोड वर्ड से होती थी सप्लाई
जांच एजेंसियों को शक है कि ड्रग्स सप्लाई के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया जाता था। ग्राहक सीधे नाम नहीं लेते थे। इसके लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल होता था।
कोड वर्ड के आधार पर सप्लाई तय होती थी। इसके बाद डिलीवरी होटल, पार्टी या तय जगह पर कराई जाती थी। अब ED यह देखेगी कि इस नेटवर्क से कितना पैसा आया और वह कहां इस्तेमाल हुआ।
आगे क्या हो सकता है
ED की जांच शुरू होने के बाद मामला और बड़ा हो सकता है। पुलिस की जांच जहां ड्रग्स नेटवर्क पर केंद्रित थी, वहीं ED अब पैसों की परतें खोलेगी। इससे उन लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिन्होंने इस कारोबार को आर्थिक मदद दी या अवैध कमाई को छिपाने में भूमिका निभाई।
फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक डिटेल और संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस केस में नए नाम सामने आ सकते हैं।
IMP FACTS
नव्या मलिक ड्रग्स केस की जांच अब ED करेगी।
रायपुर की गंज पुलिस ने केस के दस्तावेज ED को सौंपे हैं।
ED ड्रग्स सप्लाई के साथ मनी ट्रेल की जांच करेगी।
बैंक खातों संपत्ति और संदिग्ध निवेश की पड़ताल होगी।
आरोप है कि ड्रग्स सप्लाई होटल पब क्लब और पार्टियों में होती थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार नव्या के संपर्क में करीब 850 लोग थे।
आरोप है कि अमीर युवाओं को पहले दोस्ती के जरिए जोड़ा जाता था।
ड्रग्स ऑर्डर के लिए व्हाट्सएप और कोड वर्ड का इस्तेमाल होता था।
होटल पब और क्लब से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले तो ED अलग केस दर्ज कर सकती है।
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