पांच पाइंट में समझें मामले को
- किसानों के लिए खुशखबरी, अब मिलेगा आसान फसल ऋण।
- एमपी में 5 लाख करोड़ की साख योजना हुई लागू।
- किसानों को मिलेंगे 88 हजार करोड़ रुपए के लोन।
- एमएसएमई क्षेत्र के लिए भी हुआ बड़ा ऐलान अब।
- मुख्य सचिव ने सभी निजी व सरकारी बैंकों को दिए सख्त निर्देश।
मध्यप्रदेश सरकार ने 2026-27 के लिए पांच लाख करोड़ रुपए की साख योजना लागू की है। इसमें कृषि क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। किसानों के फसल ऋण के लिए 88,638 करोड़ रुपए तय किए गए हैं।
एमएसएमई क्षेत्र के लिए भी 1,62,967 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बैंकों को जिला स्तर पर योजना लागू करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है साख योजना
भोपाल में शुक्रवार को प्रदेश की वार्षिक साख योजना 2026-27 जारी की गई। यह योजना पांच लाख करोड़ रुपए की है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने इस योजना को तैयार किया है। इसमें हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग ऋण लक्ष्य तय किए गए हैं।
कृषि को मिली प्राथमिकता
नई योजना में कृषि क्षेत्र को सबसे ऊपर रखा गया है। इस क्षेत्र के लिए 1,65,117 करोड़ रुपए का लक्ष्य तय हुआ है। इसमें से किसानों को फसल ऋण के रूप में 88,638 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।
यह रकम खेती-किसानी को मजबूत करने के लिए है। छोटे और सीमांत किसानों को इससे सीधा फायदा मिलेगा। समय पर कर्ज मिलने से बुवाई और खाद-बीज की समस्या कम होगी।
एमएसएमई क्षेत्र भी शामिल
प्रदेश की उद्योगोन्मुखी नीतियों को ध्यान में रखते हुए एमएसएमई (MSME – Micro, Small and Medium Enterprises) क्षेत्र के लिए भी बड़ा लक्ष्य तय किया गया है।
इस क्षेत्र के लिए 1,62,967 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे छोटे उद्योगों और नए कारोबारियों को मदद मिलेगी। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी ऋण लक्ष्य बढ़ाया गया है। इससे प्रदेश में हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जिलों में होगा क्रियान्वयन
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वित्त विभाग और बैंकर्स कमेटी के अधिकारियों से बात की। उन्होंने जिला स्तरीय क्रेडिट प्लान जल्द लागू करने को कहा। उनका कहना है कि इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
हर जिले में अलग योजना बनाई जाएगी ताकि जरूरत के हिसाब से कर्ज मिल सके। बैंकों को समय पर लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे आम लोगों तक योजना का लाभ जल्दी पहुंच सकेगा।
बैठक में कौन रहा मौजूद
इस मौके पर भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही अन्य बैंकों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने योजना का पूरा विवरण पेश किया। सभी अधिकारियों ने मिलकर योजना को समय पर लागू करने पर सहमति जताई।
आगे क्या होगा
अब हर जिले में बैंक अधिकारी क्रेडिट प्लान तैयार करेंगे। इसके बाद किसानों और उद्यमियों तक ऋण पहुंचाने का काम शुरू होगा। सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश की खेती और उद्योग दोनों को रफ्तार मिलेगी। आने वाले महीनों में यह योजना जमीन पर कैसे उतरती है, यह देखना अहम होगा।
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