
समझें क्या है पूरा मामला...
- चुनाव आयोग ने 24 जुलाई 2025 को मानदेय बढ़ाया।
- राज्य सरकार ने 25 मई 2026 को मंजूरी दी।
- नई दरें 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगी।
- बीएलओ मानदेय छह हजार से बारह हजार हुआ।
- सुपरवाइजर मानदेय बारह हजार से अठारह हजार हुआ।
बीएलओ मानदेय भुगतान
मध्यप्रदेश में बीएलओ मानदेय भुगतान (BLO Honorarium Payment) टल गया है। नई दरें अब अप्रैल 2027 से लागू होंगी। यह तारीख सीईओ कार्यालय ने स्पष्ट की है। तब तक पुरानी दरों पर भुगतान जारी रहेगा। इससे कर्मचारियों का इंतजार करीब नौ महीने बढ़ेगा।
बीएलओ चुनावी व्यवस्था की बुनियादी कड़ी होते हैं। वे मतदाता सूची का नियमित सत्यापन करते हैं। वे नए मतदाताओं के आवेदन भी जांचते हैं। नाम सुधार और विलोपन भी उनसे जुड़ा रहता है। इसलिए मानदेय वृद्धि महत्वपूर्ण राहत मानी गई थी।
मानदेय वृद्धि का फैसला
भारत निर्वाचन आयोग ने 24 जुलाई 2025 को फैसला लिया। आयोग ने बीएलओ और सुपरवाइजर का मानदेय बढ़ाया। इसके बाद राज्य स्तर पर स्वीकृति जरूरी थी। मध्यप्रदेश के संबंधित विभाग ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई। विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने प्रस्ताव जांचा।
विभाग ने 25 मई 2026 को स्वीकृति प्रदान की। इससे मध्यप्रदेश बीएलओ मानदेय (Madhya Pradesh BLO Honorarium) का रास्ता खुला। फिर भी तत्काल भुगतान की अनुमति नहीं मिली। वित्तीय व्यवस्था अगले चरण के लिए रखी गई। इसी कारण नई दरें बाद में लागू होंगी।
आदेश में क्या कहा गया
सीईओ कार्यालय ने 30 जून को सभी कलेक्टरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी किए। आदेश में बताया गया कि आयोग ने 24 जुलाई 2025 को मानदेय बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एमपी के विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने 25 मई 2026 को इसे मंजूरी दी।मंजूरी मिलने के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भुगतान नहीं होगा। नई दरें सीधे 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगी। तब तक कर्मचारियों को पुराने मानदेय के हिसाब से ही भुगतान मिलता रहेगा।
मानदेय कितना बढ़ा
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार बीएलओ का सालाना मानदेय 6 हजार रुपए से बढ़ाकर 12 हजार रुपए किया गया है। यानी मानदेय सीधे दोगुना हो गया है। वहीं बीएलओ सुपरवाइजर का सालाना मानदेय 12 हजार रुपए से बढ़ाकर 18 हजार रुपए किया गया है।मध्यप्रदेश में 65 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र हैं। हर मतदान केंद्र की जिम्मेदारी एक बीएलओ के पास होती है। एक सुपरवाइजर चार से पांच बूथों की निगरानी करता है। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी इस फैसले से जुड़े हैं।
खर्च कौन उठाएगा
सीईओ कार्यालय ने बताया कि बढ़े हुए मानदेय का अतिरिक्त खर्च निर्वाचन नामावली की तैयारी और मुद्रण के बजट से किया जाएगा। इस खर्च को केंद्र और राज्य सरकार 50-50 के अनुपात में साझा करेंगी।विभाग के अनुसार मानदेय का भुगतान साल में चार किस्तों में होगा। ये किस्तें जून, सितंबर, दिसंबर और मार्च में दी जाएंगी। कार्यालय ने यह भी बताया कि यह फैसला वित्त विभाग की सहमति के बाद ही लिया गया है।
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