
समझें क्या है पूरा मामला...
- दतिया उपचुनाव को लेकर कांग्रेस सम्मेलन हुआ।
- जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह शामिल हुए।
- पटवारी ने नरोत्तम मिश्रा पर तंज कसा।
- कार्यकर्ताओं से पंजे पर वोट देने की अपील हुई।
- प्रत्याशी के नाम पर सस्पेंस बना रहा।
नरोत्तम मिश्रा पर सीधा हमला
मंच पर आते ही पटवारी ने भाजपा और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पर हमला बोला। उन्होंने मिश्रा को अहंकारी भैया कहकर संबोधित किया। पटवारी ने कहा कि दतिया की जनता उनके किए गए पापों को माफ नहीं करेगी। उन्होंने मिश्रा के एकल भोजन को लेकर भी तंज कसा।
पटवारी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हुए अत्याचारों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार भाजपा ने हमेशा लोकतंत्र की हत्या की है। उन्होंने कहा कि इस बार दतिया की जनता को अहंकार हराना है।
वोट पंजे पर देने की अपील
पटवारी ने मंच से कार्यकर्ताओं को एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी चाहे कोई भी हो, वोट सिर्फ पंजे पर पड़ना चाहिए। यह बयान उन्होंने कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए दिया।
नामांकन की तारीख में बदलाव
पटवारी ने भाषण के दौरान नामांकन की तारीख 12 जुलाई बताई। इसी दौरान उन्हें याद दिलाया गया कि उस दिन रविवार है। इसके बाद उन्होंने कहा कि नामांकन शनिवार या सोमवार को होगा। इस छोटी सी चूक से माहौल में हल्की हंसी भी फैली।
प्रत्याशी के नाम पर सस्पेंस
कार्यक्रम के बीच पटवारी ने कार्यकर्ताओं से पूछा कि प्रत्याशी घोषित कर दूं क्या। कार्यकर्ताओं ने एक सुर में जवाब दिया, ऐलान कर दो। कुछ पल रुककर पटवारी ने कहा कि उनका प्रत्याशी हाथ का पंजा है। इसके बाद भी उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं हुआ। इस जवाब से कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी रही। कई नेता खुद प्रत्याशी बनने का दावा कर रहे हैं। इस वजह से नाम को लेकर सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
दिग्विजय का भाषण बीच में रुका
कार्यक्रम के दौरान दिग्विजय सिंह अपना संबोधन दे रहे थे। लेकिन बीच में उन्हें भाषण रोकना पड़ा। इसी बीच पटवारी एक मोबाइल फोन लेकर मंच पर पहुंचे। फोन पर दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती बात कर रहे थे।
मोबाइल का स्पीकर ऑन करके माइक के पास रखा गया। इससे कार्यकर्ता भी बातचीत सुन सके। राजेंद्र भारती ने बताया कि दिल्ली में उनका हर्निया का ऑपरेशन हुआ है। इसी वजह से वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
गुटबाजी थामने की कोशिश
दतिया उपचुनाव के लिए कांग्रेस में कई नेता दावेदारी जता रहे हैं। यह सम्मेलन गुटबाजी थामने के लिए अहम माना जा रहा था। हालांकि प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं होने से असमंजस बना हुआ है।
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