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हाथियों की बदहाली पर कोर्ट नाराज, अब प्रधान मुख्य वन संरक्षक होंगे हाजिर

By Mukesh Sharma | Jul 02, 2026
समझें क्या है पूरा मामला हाथियों की दुर्दशा पर हाई कोर्ट सख्त, वन प्रमुख हाई कोर्ट…

समझें क्या है पूरा मामला

राजस्थान हाई कोर्ट हा​थी गांव में रह रहे हाथियों की दुर्दशा को लेकर नाराज दिखा। उसने हाथियों के लिए उचित कदम नहीं उठाने और वन विभाग से किसी वकील के पेश नहीं होने पर कड़ा ऐतराज जताया है। 

कोर्ट ने 23 जुलाई को प्रधान मुख्य वन संरक्षक को व्यक्तिगत रुप से हाजिर होने के निर्देश दिए हैं। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा ने यह निर्देश जनहित याचिका की सुनवाई के बाद दिए। 

हाई कोर्ट ने आमेर स्थित हाथी गांव और पर्यटकों को घुमाने वाले हाथियों की दुर्दशा पर स्व:प्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी। गुरुवार को राज्य सरकार की ओर से एक शपथ पत्र दाखिल किया गया। 

इसमें बताया गया कि हाथी गांव में पशु चिकित्सकों की एक टीम तैनात है। यह टीम हाथियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच करती है। जांच में सभी हाथी करीब-करीब स्वस्थ हैं। 

सरकार मूल जानकारी नहीं दे रही 

इस मामले में न्याय मित्र एडवोकेट शोभित तिवाड़ी ने दो शपथ पत्र पेश किए। एक शपथ पत्र में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 2008 में हाथियों के संरक्षण व कल्याण के लिए दिशा-निर्देश बनाए थे। 

इन दिशा-निर्देशों की पालना में हाथी गांव की क्या स्थिति है, यही इस याचिका का मूल उद्देश्य है। राज्य सरकार इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दे रही है। 

क्रूरता के कारण मर चुकी है चंचल हथिनी

एडवोकेट शोभित तिवाड़ी ने कोर्ट को बताया कि मई में आईपीएल मैच के दौरान चंचल नाम की हथिनी को गुलाबी रंग से रंग दिया था। इस क्रूरता के कारण उस ​हथिनी की मौत हो गई थी। 

एक हथिनी को सरकार स्वस्थ बता रही है। सच्चाई यह है कि बीमारी के कारण उसे जामनगर के वंतारा में भेजा गया है। इससे साफ है कि हाथियों की उचित देखभाल नहीं हो रही है। 

एक-दूसरे पर डाली जिम्मेदारी

सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज शर्मा व माही यादव ने कहा कि इस संबंध में जानकारी वन विभाग देगा। वन विभाग की ओर से कोई वकील हाजिर ही नहीं हुआ है। 

सरकारी विभागों के एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालने से कोर्ट नाराज दिखा। उसने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को 23 जुलाई को हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।

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