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HLL के लैब सेटअप पर गंभीर सवाल, मरीजों की रिपोर्ट में अंतर से हड़कंप

HLL के लैब सेटअप पर गंभीर सवाल, मरीजों की रिपोर्ट में अंतर से हड़कंप

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VINAY VERMA

Published Jul 02, 2026 at 16:05

समझें क्या है पूरा मामला धमतरी जिला अस्पताल की HLL संचालित अटल आरोग्य लैब की जांच…

समझें क्या है पूरा मामला

धमतरी जिला अस्पताल की HLL संचालित अटल आरोग्य लैब की जांच रिपोर्टों में गंभीर विरोधाभास सामने आने के बाद मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। पैथोलॉजी प्रभारी ने कंपनी के एमडी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

HLL जांच रिपोर्टों पर सवाल

छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में जांच व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए शुरू की गई नई व्यवस्था सवालों के घेरे में है। HLL Lifecare कंपनी के जरिए संचालित इस व्यवस्था में मरीजों की जांच रिपोर्टों में ऐसे विरोधाभास सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे स्वास्थ्य महकमे को सकते में डाल दिया है। एक ही मरीज की रिपोर्ट कुछ घंटों या एक-दो दिन के भीतर पूरी तरह बदल जा रही है। कुछ डॉक्टरों को संदेह होने पर दोबारा जांच कराई गई, जिसमें रिपोर्ट बदल गई। सबसे बड़ी बात यह है कि इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है।

करोड़ों के सेटअप की खुली पोल

स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों में अत्याधुनिक मशीनों के जरिए गुणवत्तापूर्ण जांच उपलब्ध कराने का दावा किया था। इसी उद्देश्य से HLL Lifecare कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन धमतरी जिला अस्पताल में शुरू हुई अटल आरोग्य लैब की रिपोर्टों ने इन दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई मामलों में डॉक्टरों को रिपोर्ट संदिग्ध लगी तो उन्होंने दोबारा जांच कराई, जिसमें परिणाम पूरी तरह बदल गए। इससे मरीजों के इलाज की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

MD को लिखी चिट्ठी

HLL के लैब

HLL के लैब सेटअप पर गंभीर सवाल

 

मामले में जिला अस्पताल के पैथोलॉजी प्रभारी डॉ. आदित्य सिन्हा ने HLL Lifecare के एमडी को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर, सीएमएचओ और एनएचएम के एमडी को भी भेजी गई है। पत्र में कहा गया है कि लगातार विरोधाभासी रिपोर्टें लैब की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली, मशीनों की क्षमता, रिपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया और तकनीकी स्टाफ की दक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

सिर्फ 24 घंटे में 6.2 ग्राम हीमोग्लोबिन गायब

डॉ. सिन्हा ने अपनी शिकायत में 17 वर्षीय मरीज भमेश्वरी का उदाहरण दिया है। 17 जून की रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन 14.7 ग्राम, आरबीसी 5.57 मिलियन और प्लेटलेट 1.13 लाख दर्ज था। लेकिन अगले ही दिन 18 जून की रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन सीधे 8.5 ग्राम, आरबीसी 3.13 मिलियन और प्लेटलेट 2.67 लाख हो गया। डॉक्टरों के अनुसार इतने कम समय में शरीर में ऐसा बदलाव सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं होता।

एक दिन में पूरी ब्लड प्रोफाइल बदल गई

46 वर्षीय कृपाराम मंडावी की 19 जून की सीबीसी रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन 19.8 ग्राम, आरबीसी 7.03 मिलियन और पीसीवी 60.60 प्रतिशत दर्ज किया गया। अगले ही दिन 20 जून की रिपोर्ट में यही आंकड़े घटकर क्रमशः 13.1 ग्राम, 4.66 मिलियन और 40.70 प्रतिशत रह गए। इतनी बड़ी गिरावट को चिकित्सकीय दृष्टि से सामान्य नहीं माना जाता।

नवजात का ब्लड ग्रुप ही बदल गया 

नवजात का ब्लड ग्रुप ही बदल गया

बिलासपुर में 9 जून को जन्मी नवजात बच्ची का ब्लड ग्रुप ‘ओ पॉजिटिव’ बताया गया था, जबकि 11 जून को जारी दूसरी रिपोर्ट में उसी बच्ची का ब्लड ग्रुप ‘ए पॉजिटिव’ दर्ज किया गया। एक ही मरीज की दो अलग-अलग रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और लैब की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

सीधे डायलिसिस पर भेजा जा सकता था

सबसे गंभीर मामला 50 वर्षीय विनायक राम का बताया गया है। 16 जून की जांच में यूरिया 23.60, बीयूएन 11.02 और क्रिएटिनिन 0.32 दर्ज था। जबकि 20 जून की रिपोर्ट में यूरिया 280.7, बीयूएन 131.17 और क्रिएटिनिन 17.40 दर्शाया गया। इस तरह की रिपोर्ट किसी भी मरीज को गंभीर किडनी फेल्योर का मरीज दिखा सकती है। यदि डॉक्टर केवल इसी रिपोर्ट पर भरोसा करते तो मरीज को तत्काल डायलिसिस जैसी गंभीर प्रक्रिया की सलाह दी जा सकती थी।

तकनीकी गड़बड़ी या गुणवत्ता नियंत्रण फेल?

शिकायत में कहा गया है कि यह किसी एक तकनीशियन की व्यक्तिगत गलती नहीं लगती, बल्कि पूरी लैब की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर सवाल है। जब अलग-अलग मरीजों की रिपोर्टों में लगातार ऐसे विरोधाभास सामने आ रहे हैं तो मशीनों की कैलिब्रेशन, सैंपल प्रोसेसिंग, गुणवत्ता परीक्षण और रिपोर्ट सत्यापन की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। यही वजह है कि तकनीकी ऑडिट की मांग तेज हो गई है।

मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

धमतरी जिला अस्पताल से सामने आया यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित है या पूरे प्रदेश में संचालित HLL लैब नेटवर्क में भी ऐसी स्थिति है, यह जांच का विषय है। अब स्वास्थ्य विभाग से पूछा जा रहा है कि करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी या नहीं। यदि जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगे, तो सबसे बड़ा नुकसान उन मरीजों का होगा, जो सरकारी अस्पतालों की लैब पर भरोसा कर अपना इलाज करा रहे हैं।

FAQ

धमतरी HLL लैब मामला क्या है?
धमतरी जिला अस्पताल की HLL लैब की रिपोर्टों में बड़ा अंतर मिला है। एक ही मरीज की रिपोर्ट कुछ घंटों में बदल गई। पैथोलॉजी प्रभारी ने इसकी शिकायत की है।
HLL Lifecare क्या है?
HLL Lifecare एक कंपनी है जो सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी लैब सेवाएं संचालित करती है। छत्तीसगढ़ में इसे अटल आरोग्य लैब चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह जांच रिपोर्टों की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार होती है।
CMHO का पूरा नाम क्या है?
CMHO का पूरा नाम Chief Medical and Health Officer है। यह जिले के स्वास्थ्य विभाग का सबसे वरिष्ठ अधिकारी होता है। इस मामले में शिकायत की प्रतिलिपि सीएमएचओ को भी भेजी गई है।
NHM का पूरा नाम क्या है?
NHM का पूरा नाम National Health Mission है। यह भारत सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य योजना है। इसी योजना के तहत अस्पतालों में कई सुविधाएं दी जाती हैं।

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