समझें क्या है पूरा मामला...
- दतिया उपचुनाव का एलान, कांग्रेस ने भाजपा को घेरा।
- 30 जुलाई को वोटिंग, 3 अगस्त को आएगा नतीजा।
- सिंघार बोले, चुनाव आयोग दिखा रहा है जल्दबाजी।
- भारती की सदस्यता रद्द होने से खाली हुई सीट।
- 2023 में मिश्रा को हराकर जीती थी कांग्रेस।
निर्वाचन आयोग ने दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। यहां 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को नतीजे आएंगे।
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने से यह सीट खाली हुई थी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग पर जल्दबाजी का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस यह सीट दोबारा जीतेगी।
आयोग ने की उपचुनाव की घोषणा
निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को तीन राज्यों की विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की। इनमें बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात शामिल हैं। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे।
मतगणना 3 अगस्त को होगी। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सिंघार का भाजपा पर हमला
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की टाइमिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक निर्मला सप्रे के मामले में अब तक कोई फैसला नहीं आया है।
इसके बावजूद दतिया में उपचुनाव जल्दी कराया जा रहा है। सिंघार ने आरोप लगाया कि आयोग दो अलग मामलों में अलग रवैया अपना रहा है। उन्होंने इसे भाजपा के पक्ष में उठाया गया कदम बताया।
2023 के चुनाव का हवाला
सिंघार ने 2023 के विधानसभा चुनाव का जिक्र किया। उस चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराया था। डॉ. मिश्रा प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री रह चुके हैं।
सिंघार का कहना है कि उस चुनाव से जुड़े मामलों में भी आयोग ने फैसला लंबे समय तक टाला। उनके मुताबिक यह रवैया अब दतिया में भी दोहराया जा रहा है।
कांग्रेस की जीत का दावा
सिंघार ने कार्यकर्ताओं और जनता से तैयार रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। उनका दावा है कि पार्टी दतिया सीट दोबारा जीतेगी। यह बयान कांग्रेस की आगामी रणनीति का संकेत माना जा रहा है। पार्टी इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देख रही है।
सदस्यता रद्द होने की वजह
दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने से खाली हुई थी। एक आर्थिक अनियमितता के मामले में अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी।
भारती ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है। हालांकि अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। इसी वजह से सीट पर उपचुनाव कराना जरूरी हो गया।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजरें 30 जुलाई की वोटिंग पर टिकी हैं। दोनों प्रमुख दल इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। नतीजे 3 अगस्त को साफ हो जाएंगे।
यह उपचुनाव मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है। इसका असर आने वाले समय की सियासी बिसात पर भी दिख सकता है।
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