समझें क्या है पूरा मामला
Bilaspur। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पुलिस रेंज में फरार अपराधियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। पुलिस अब केवल दबिश और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। आरोपियों के बैंक खाते, पैन कार्ड और आधार से जुड़ी जानकारी भी खंगाली जाएगी। जरूरत पड़ने पर बैंक खातों में लेन-देन रोकने की कार्रवाई की जाएगी।
बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की। बैठक में रेंज के आठ जिलों के पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, नशीले पदार्थों से जुड़े लंबित मामलों, समन-वारंट की तामीली और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतों पर चर्चा हुई।
फरार आरोपियों के आर्थिक नेटवर्क पर नजर
आईजी रामगोपाल गर्ग ने अधिकारियों से कहा कि लंबे समय से फरार आरोपियों पर दबाव बढ़ाया जाए। पुलिस उनके बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटाएगी। पैन कार्ड और आधार से जुड़े रिकॉर्ड की मदद से आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया जाएगा।
नियमों के तहत जरूरत पड़ने पर बैंक खातों को सीज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य फरार आरोपियों को आर्थिक मदद मिलने से रोकना है। पुलिस उन लोगों की पहचान भी करेगी जो फरारी के दौरान आरोपियों को पैसा, वाहन या रहने की जगह उपलब्ध करा रहे हैं।
मोबाइल और वाहनों से मिलेगा सुराग
फरार अपराधियों की तलाश में तकनीकी साधनों का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। पुलिस आरोपियों के मोबाइल नंबर, पुराने संपर्क और वाहनों की जानकारी जुटाएगी। अलग-अलग स्थानों से मिलने वाले तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस टीमों को सक्रिय किया जाएगा।
नेटग्रिड से मिलने वाली सूचनाओं का भी उपयोग किया जाएगा। पहले से गिरफ्तार सह-आरोपियों से पूछताछ कर फरार लोगों के संभावित ठिकानों की जानकारी ली जाएगी। पुलिस दूसरे जिलों और राज्यों की एजेंसियों से भी संपर्क बढ़ाएगी।
एनडीपीएस मामलों के लिए विशेष रणनीति
बैठक में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा की गई। आईजी ने कहा कि जिन मामलों में आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं उनके लिए अलग कार्ययोजना तैयार की जाए।
फरार आरोपियों का पूरा विवरण नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को भेजने के निर्देश दिए गए। अंतरजिला और अंतरराज्यीय समन्वय मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। पुलिस अधीक्षकों को इन मामलों की स्वयं निगरानी करने के लिए कहा गया है।
समन और वारंट की तामीली में देरी पर नाराजगी
न्यायालयों से जारी समन और वारंट की लंबित तामीली पर आईजी ने नाराजगी जताई। कई गंभीर मामलों में गवाहों, डॉक्टरों और पुलिस अधिकारियों की समय पर उपस्थिति नहीं होने से अदालत को बार-बार वारंट जारी करने पड़ते हैं।
आईजी ने थाना प्रभारियों और नोडल अधिकारियों को समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गंभीर मामलों की निगरानी पुलिस अधीक्षक स्तर से की जाएगी। लापरवाही मिलने पर संबंधित थाना प्रभारी और राजपत्रित अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही की व्यवस्था बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य अदालत की प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करना है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतों पर सख्ती
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से मिलने वाली शिकायतों का समय सीमा में समाधान नहीं होने पर भी आईजी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने से पहले उसका उचित निराकरण किया जाए।
समय सीमा पार होने वाली शिकायतों पर संबंधित थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस दिया जा सकता है। पुलिस अधीक्षकों को हेल्पलाइन की शिकायतों की नियमित समीक्षा करने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
आठ जिलों की पुलिस को लगातार निगरानी के निर्देश
बैठक में बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, सक्ती, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के अधिकारी शामिल हुए।
आईजी ने कानून व्यवस्था मजबूत रखने, सराफा बाजारों की नियमित जांच और पिकेट प्वाइंट की निगरानी बढ़ाने को कहा। अगले महीने नशीले पदार्थों से जुड़े लंबित मामलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी। सभी पुलिस अधीक्षकों को फरार आरोपियों की गिरफ्तारी तक लगातार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने समीक्षा बैठक ली।
बैठक में रेंज के आठ जिलों के एसपी शामिल हुए।
फरार आरोपियों के बैंक खाते सीज किए जा सकते हैं।
आधार और पैन कार्ड से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।
मोबाइल, वाहन और नेटग्रिड डेटा से आरोपियों की तलाश होगी।
एनडीपीएस मामलों के फरार आरोपियों पर विशेष कार्रवाई होगी।
समन-वारंट की तामीली में लापरवाही पर कार्रवाई होगी।
सीएम हेल्पलाइन शिकायतों में देरी पर नोटिस जारी होगा।
पुलिस अधीक्षक खुद इन मामलों की निगरानी करेंगे।
FAQ
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