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सीमांकन रिपोर्ट देने में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, तहसीलदार को 15 दिन की मोहलत

By Umeshwari Baghel | Jul 02, 2026
समझें क्या है पूरा मामला  Bilaspur। जमीन का सीमांकन पूरा होने के बाद भी रिपोर्ट की…

समझें क्या है पूरा मामला 

Bilaspur। जमीन का सीमांकन पूरा होने के बाद भी रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति नहीं देने पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बिलासपुर तहसीलदार को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को 15 दिनों के भीतर सीमांकन रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। यह आदेश जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने दिया है।

मामला बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र स्थित लक्ष्मी निवास कॉलोनी का है। यहां रहने वाले 58 वर्षीय सुधीर मिश्रा ने सीमांकन रिपोर्ट नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव सहित बिलासपुर कलेक्टर और तहसीलदार को पक्षकार बनाया था।

खसरा नंबर 158/6 की जमीन का मामला

याचिकाकर्ता के अनुसार उनकी भूमि खसरा नंबर 158/6 में दर्ज है। इसका कुल क्षेत्रफल 0.61 हेक्टेयर है। उन्होंने जमीन का सीमांकन कराने के लिए राजस्व विभाग के समक्ष आवेदन किया था।

सीमांकन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 अप्रैल 2026 को राजस्व अधिकारियों की टीम बनाई गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन की जांच और नाप-जोख की। इसके बाद सीमांकन रिपोर्ट तैयार कर संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई।

रिपोर्ट विभाग के पास पहुंचने के बावजूद उसकी प्रमाणित प्रति जमीन मालिक को नहीं दी गई। इसी कारण याचिकाकर्ता को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

प्रमाणित प्रति के लिए किया था आवेदन

सुधीर मिश्रा ने सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति लेने के लिए 10 अप्रैल 2026 को आवेदन दिया था। सीमांकन की कार्रवाई पूरी होने के बाद भी उन्हें दस्तावेज नहीं मिला। उन्होंने राजस्व कार्यालय के स्तर पर रिपोर्ट प्राप्त करने का प्रयास किया। लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकलने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद सिन्हा ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनके मुवक्किल को अपनी ही जमीन से संबंधित सरकारी दस्तावेज के लिए भटकना पड़ रहा है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि सीमांकन रिपोर्ट की प्रति नहीं मिलने से याचिकाकर्ता आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहा है। जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए भी इस रिपोर्ट की आवश्यकता है।

तहसीलदार को हाईकोर्ट का निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने बिलासपुर तहसीलदार को स्पष्ट निर्देश जारी किया।

कोर्ट ने कहा कि संबंधित भूमि की सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति याचिकाकर्ता को 15 दिनों के भीतर दी जाए। इससे वह अपने कानूनी अधिकारों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकेगा।

इस आदेश के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। अदालत के निर्देश के बाद अब तहसील कार्यालय को तय समयसीमा में रिपोर्ट उपलब्ध करानी होगी।

आदेश से राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ी

हाईकोर्ट का यह आदेश जमीन से जुड़े मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही की ओर ध्यान दिलाता है। सीमांकन रिपोर्ट भूमि की वास्तविक सीमा और स्थिति स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेज होता है।

ऐसी रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने से जमीन मालिक को नामांतरण और स्वामित्व विवाद जैसी प्रक्रियाओं में परेशानी हो सकती है। कोर्ट के निर्देश से स्पष्ट है कि सीमांकन पूरा होने के बाद संबंधित व्यक्ति को रिपोर्ट देने में अनावश्यक देरी नहीं की जा सकती।

महत्वपूर्ण तथ्य

मामला बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र का है।
याचिकाकर्ता का नाम सुधीर मिश्रा है।
जमीन खसरा नंबर 158/6 में दर्ज है।
भूमि का क्षेत्रफल 0.61 हेक्टेयर है।
सीमांकन टीम 15 अप्रैल 2026 को गठित हुई थी।
रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन किया गया था।
रिपोर्ट तैयार होने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
हाईकोर्ट ने तहसीलदार को 15 दिन का समय दिया।
आदेश जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने जारी किया।
कोर्ट ने निर्देश के साथ याचिका का निराकरण किया।

FAQ

हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
हाईकोर्ट ने बिलासपुर तहसीलदार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को 15 दिनों के भीतर सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति दी जाए।
याचिका किसने दायर की थी?
यह याचिका बिलासपुर के सरकंडा निवासी सुधीर मिश्रा ने दायर की थी। मामला उनकी जमीन के सीमांकन रिपोर्ट से जुड़ा है।
विवाद की वजह क्या थी?
सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। रिपोर्ट भी तैयार हो गई थी। इसके बाद भी याचिकाकर्ता को उसकी प्रमाणित प्रति नहीं दी जा रही थी।

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