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छत्तीसगढ़ में निजी अस्पताल पर कार्रवाई, OT और ICU सील

छत्तीसगढ़ में निजी अस्पताल पर कार्रवाई, OT और ICU सील

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Umeshwari Baghel

Published Jul 04, 2026 at 20:38

समझें क्या है पूरा मामला  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के…

समझें क्या है पूरा मामला 

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े गंभीर मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। डी.डी. अस्पताल सेमरा के ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू वार्ड को सील कर दिया गया है। अस्पताल का पंजीयन भी अस्थायी और सशर्त रूप से निरस्त किया गया है।

यह कार्रवाई गंभीर चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद की गई है। प्रशासन ने साफ कहा है कि मरीजों की सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

किस मामले में हुई कार्रवाई

यह मामला 22 जून 2026 से जुड़ा है। एक गंभीर अवस्था वाली प्रसूता ज्योति सोनवानी को जिला अस्पताल से सिम्स बिलासपुर रेफर किया गया था। उपचार को लेकर परिजनों और नागरिकों ने शिकायतें उठाई थीं। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीर माना।

कलेक्टर और पर्यवेक्षी प्राधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच टीम बनवाई। टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। जांच में कई गंभीर कमियां सामने आईं।

जांच में क्या-क्या मिला

निरीक्षण में पाया गया कि गंभीर मरीजों के उपचार के लिए जरूरी विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए जरूरी संसाधनों की कमी भी सामने आई।

जांच में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े हितग्राहियों से अतिरिक्त शुल्क लेने की शिकायतें भी सामने आईं। इन शिकायतों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया।

गंभीर मरीज का इलाज बिना जरूरी सुविधा

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक ने अस्पताल का दोबारा निरीक्षण किया। इस दौरान सामने आया कि एक्लेम्प्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का इलाज जरूरी विशेषज्ञों के बिना किया गया।

अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था नहीं थी। एनेस्थेटिस्ट भी उपलब्ध नहीं था। ऑपरेशन के बाद मरीज की देखभाल के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधा भी पर्याप्त नहीं मिली। इसके बावजूद गंभीर मरीजों का उपचार किया जा रहा था। प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही माना है।

अस्पताल प्रबंधन से मांगा गया जवाब

मामले में अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। प्रबंधन से जवाब मांगा गया। जवाब और जांच रिपोर्टों की समीक्षा के बाद प्रशासन ने पाया कि अस्पताल की ओर से रखे गए कई तथ्य जांच में सही नहीं पाए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कानूनों और नियमों के कई प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। एक अन्य गंभीर प्रसूता के उपचार में भी लापरवाही से जुड़े तथ्य मिले।

प्रशासन ने क्या आदेश दिया

सभी तथ्यों और अधिकारियों की अनुशंसा के आधार पर जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील करने का आदेश दिया। अस्पताल का पंजीयन अस्थायी और सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया।

आदेश की प्रतिलिपि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है। पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचना दी गई है।

सरकार का सख्त संदेश

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। सरकार का कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमों का पालन जरूरी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार सुरक्षित और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दे रही है। प्रशासन ने कहा है कि चिकित्सीय लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मामलों में कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्यों अहम है यह मामला

यह कार्रवाई सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। इससे निजी अस्पतालों को भी साफ संकेत मिला है कि गंभीर मरीजों का इलाज बिना विशेषज्ञ और जरूरी संसाधनों के नहीं किया जा सकता।

मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अस्पतालों को लाइसेंस और नियमों की शर्तों का पालन करना होगा। ऐसा नहीं होने पर प्रशासन सीलिंग और पंजीयन निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई कर सकता है।

IMP FACTS

मामला छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का है।
कार्रवाई डी.डी. अस्पताल सेमरा पर हुई है।
अस्पताल का OT और ICU वार्ड सील किया गया है।
अस्पताल का पंजीयन अस्थायी रूप से निरस्त किया गया है।
मामला 22 जून 2026 की एक गंभीर प्रसूता से जुड़ा है।
प्रसूता ज्योति सोनवानी को जिला अस्पताल से सिम्स बिलासपुर रेफर किया गया था।
जांच में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी सामने आई।
अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट उपलब्ध नहीं थे।
गंभीर मरीजों के इलाज के लिए जरूरी संसाधन पर्याप्त नहीं मिले।
आयुष्मान भारत योजना के मरीजों से अतिरिक्त शुल्क लेने की शिकायत भी मिली।
प्रशासन ने इसे गंभीर चिकित्सीय लापरवाही माना है।
कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन के निर्देश पर कार्रवाई हुई।

FAQ

डी.डी. अस्पताल पर कार्रवाई क्यों हुई?
डी.डी. अस्पताल पर गंभीर मरीज के इलाज में लापरवाही के आरोप लगे। जांच में डॉक्टरों और जरूरी सुविधाओं की कमी मिली।
प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है?
प्रशासन ने अस्पताल का OT और ICU सील कर दिया। अस्पताल का पंजीयन भी अस्थायी रूप से निरस्त किया गया है।
यह मामला किस मरीज से जुड़ा है?
यह मामला 22 जून 2026 की प्रसूता ज्योति सोनवानी से जुड़ा है। उन्हें गंभीर हालत में सिम्स बिलासपुर रेफर किया गया था।

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