
भोपाल नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। फेस अटेंडेंस में लगातार गैरहाजिर रहने वाले 900 कर्मचारियों की आईडी ब्लॉक कर दी गई है। इनमें से करीब 800 कर्मचारियों ने पूरे महीने एक भी दिन हाजिरी नहीं लगाई थी। इस वजह से इन सभी का इस महीने का वेतन रोक दिया गया है। अब हर कर्मचारी को निगम आयुक्त के सामने पेश होकर सफाई देनी होगी।
भोपाल में नगर निगम की यह कार्रवाई हड़कंप मचा रही है। लंबे समय से फेस अटेंडेंस सिस्टम को लेकर ढिलाई बरती जा रही थी। कई कर्मचारी महीनों तक दफ्तर आए बिना ही वेतन उठा रहे थे। अब निगम प्रशासन ने रिकॉर्ड खंगालकर सख्त कदम उठाया है।
आईडी ब्लॉक से रुका वेतन
निगम प्रशासन ने साफ किया है कि जिन कर्मचारियों ने महीने में पांच दिन या उससे कम दिन हाजिरी दर्ज कराई, उनकी आईडी ब्लॉक कर दी गई है। इस वजह से अब ये कर्मचारी दफ्तर में हाजिरी दर्ज ही नहीं कर पा रहे। साथ ही इनका पूरा वेतन रोक दिया गया है।
निगम ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी कर्मचारी सीधे कमिश्नर के पास नहीं जाएगा। पहले उसे अपने विभागाध्यक्ष (एचओडी – Head of Department) के जरिए आवेदन करना होगा। इसके बाद ही उसे निगमायुक्त संस्कृति जैन के सामने पेश होने का मौका मिलेगा।
अगर कर्मचारी अपनी अनुपस्थिति का संतोषजनक कारण बता पाया, तभी उसकी आईडी दोबारा चालू होगी। साथ ही रुका हुआ वेतन भी उसके बाद ही जारी किया जाएगा। यानी बिना स्पष्टीकरण के फिलहाल कोई राहत नहीं मिलेगी।
सख्ती से लागू हुआ नियम
सूत्रों के मुताबिक फेस अटेंडेंस सिस्टम(चेहरे से हाजिरी) पिछले साल ही लागू हो गया था। लेकिन कर्मचारियों के भारी विरोध के चलते यह सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं हो सका था। कई महीनों तक ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरीकों से हाजिरी दर्ज होती रही।
इस दौरान वेतन भी नियमित रूप से जारी होता रहा। किसी पर कोई सख्ती नहीं दिखाई गई। लेकिन अब निगम प्रशासन ने पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा कर सीधी कार्रवाई शुरू कर दी है।
इंजीनियर और अफसर भी दायरे में
इस कार्रवाई में सिर्फ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी ही नहीं आए हैं। अलग-अलग विभागों में तैनात इंजीनियर भी इसकी जद में हैं। इनके अलावा राजस्व विभाग के एआरआई, वार्ड प्रभारी और जोनल अधिकारी (जेडओ – Zonal Officer) भी शामिल हैं।
निगम प्रशासन अब यह सत्यापित कर रहा है कि हर कर्मचारी वास्तव में कहां तैनात है। सूत्रों का कहना है कि बड़ी संख्या में निगम कर्मचारी मंत्रियों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों में संबद्ध होकर काम कर रहे हैं। ऐसे सभी मामलों की भी जांच की जा रही है।
400 कर्मचारियों पर उठे सवाल
निगम के 85 वार्डों में करीब 400 दैनिक वेतनभोगी 29 दिवसीय कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से कई को लेकर दावा किया जा रहा है कि वे जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर रखे गए हैं। आरोप है कि ये कर्मचारी नियमित रूप से कार्यस्थल पर मौजूद नहीं रहते।
निगम प्रशासन अब इन कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती और कार्य की भी जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और कार्रवाई हो सकती है। कर्मचारियों में इसे लेकर हलचल का माहौल है।
कामचोरी को रोकना लक्ष्य
निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि कम उपस्थिति वाले कर्मचारियों की अटेंडेंस आइडी ब्लाक की गईं हैं। इस सिस्टम का उद्देश्य फर्जी उपस्थिति के जरिए होने वाली कामचोरी को रोकना है।
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